जो भूले भटके इधर आ गए हो उन्हें मेरा सादर प्रणाम |
इससे पहले की आप इस blog के नाम को लेकर विचलित हो, लीजिये हम ही आपकी ये दुविधा दूर किए देते है |
तो जनाब किस्सा ऐसा हुआ की google indic transliteration नाम की एक चिडिया के बारे में हमने सुना इक दिन | google का एक और नायब तोहफा जिसने हिंदी में लिखना न केवल सरल कर दिया है बल्कि इसका आधार हम भारतियों का अंग्रेजी के प्रति लगाव ही है | अजी , जिस फर्राटे से रोमन लिपि में हम अपनी राष्ट्रीय भाषाओँ को लिखते है, उसे देखकर तो फिरंगी भी शर्मा जाए | chats जो हम युवा पीढी के वार्तालाप का नया माध्यम सा बना हुआ है उसमे बातें सारे लिखी तो अंग्रेजी की लिपि में जाती है पर होती सारी बाते दरअसल अपनी भाषाओँ में है |
इन्हें अँगरेज़ देखते और सोचते होंगे की किन उम्मीदों से यह भाषा बनायीं थी और अब इसका क्या कर दिया है | अब दो सौ सालो की गुलामी की खसारत देनी तो परेगी ही | तो जनाब ये तो बात ऐसी हो गयी की मुन्ने को एक बार स्कूल में निबंध लिखने के लिए कहा गया गाय पर | पर उनकी मम्मी जी ने तो उन्हें कुत्ते पे लिखने सिखाया था.... अब इतनी नन्ही सी जान करे भी तो क्या करे | तो निबंध ऐसे प्रारंभ हुआ की गाय हमारी माता है ; इसकी एक पूँछ होती है ; चार टाँगे भी होती है | एक और प्राणी की ऐसी ही चार टांगें होती है ; उसे हम कुत्ता कहते है ; शुद्ध भाषा में इसे स्वान भी कहते है ; ये मनुष्य की सबसे प्रिय मित्र होता है | और देखते ही देखते इस मूक प्राणी पर अपनी सारी भड़ास निकाल दी |
तो हम कह यह रहे थे की ऐसी हमारी कोई मंशा नहीं है | अब जितना फिर भी गलती से हो जाए उसे माफ़ कर दीजियेगा| ये भटकने की बीमारी मेरे सात पुश्तों से चली आ रही है| जाते जाते भी जा नहीं पाया | जैसा हमारा अंग्रेजी का प्रेम | तो google वालों ने सोचा की इसी का इस्तेमाल करते है , और इस google indic transliteration का ईजात किया| अब आप कहेंगे की महाशय इतने दिन कहाँ थे आप, यह कोई आसमान से आज थोड़े ही टपकी है , google की यह पेशकश भी काफी पुरानी हो गयी है| मेरे जो मित्र orkutting को अपना परम धर्म मानते है उन्हें याद होगा की यह सुविधा orkut में कई दिनों पहले ही आ गयी थी | अब यह मसला अलग है कि हमने उसके साथे सौतेला व्यवहार किया |
अब क्या कहे - स्वचालित अनुवादकों का हमारा अनुभव ही ऐसा कुछ रहा है | मसलन हमारे एक मित्र ने एक बार हमे एक अनुवाद करके बताया - अंग्रेजी से हिंदी में | शब्द था - Hot Chick | अब मेरे जो मित्र यहाँ अंग्रेजी में अक्सर वार्तालाप करते है उन्हें यह ज्ञात होगा कि यह bird flu के खिलाफ इजात कि गयी कोई नई तकनीक नहीं है| पर मिट्टी के माधव अनुवादक को कौन समझाए ; उसने बिना वक़्त बर्बाद किए अनुवाद कर दिया - गरम चूज़ा| मुझे पूरा यकीन है कि दुसरे भाषाओं में भी यह हमारी ऐसी ही खिल्ली उडाता होगा |
पर जब इस चिडिया को वास्तव में परख कर देखा तो दिल को भा गयी | blog न करने के निश्चय से हमे हटना ही पड़ा | खैर जब नाम चुनने का अवसर आया तो हमे यह नाम मुन्ने की वजह से पसंद आया या इससे जुड़े लोकोक्ति(" गाय हमारी माता है , हमको कुछ नहीं आता है ") की वजह से यह कहना मुश्किल है | शायद दोनों से प्रेरित होगा ; वैसे भी दोनों में काफी समानता है, दोनों ही परीक्षाओ से पहले हमारी स्थिति को दर्शाती है | और हमारे देश वासियों कि गौ माता के प्रति प्रेम वैसे भी अब दुनिया से छुपी नहीं है | दुनिया कि ज्यादातर सभ्यता जो beef खाती है इसे बड़े ही शंका कि दृष्टि से देखती है | और भारतियों की विश्व में कुछ ऐसी ही छवि बन गयी है |
हाल ही कुछ फिल्मों में भी इसे बड़ी उत्सुकता के साथ दर्शाया गया है | जी मैं केवल Outsourced जैसी फिल्मों का ज़िक्र नहीं कर रहा है , बल्कि Delhi6 की उस scene की भी बात कर रहा हूँ | कहीं तो भारतियों को भी यह छवि अब खटकने लगी है | पर मेरा उद्देश्य इसके विषय में आपको जागरूक करना कतई नहीं है | अब तक तो मेरी बातें करनी की शैली से परिचित हो ही गए होंगे और समझ ही गए होंगे , कि सार बस इतना है कि अगर हिंदी में कोई blog लिखी जाए तो इस नाम से उचित और क्या हो |
खैर अगली बार और किसी आसान विषय पर बात करेंगे , जिसे इतने विस्तार से समझाना न पड़े | और अगर कुछ भूल चूक हो गयी हो तो क्षमा कीजियेगा | अब तो आपको ज्ञात हो ही गया है कि
गाय हमारी माता है
हमको कुछ नहीं आता है
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वाह भई, नवीन तुम्हारा हिंदी ब्लॉग पढ़कर वाक़ई में बड़ा मज़ा आया.
ReplyDeleteसुनील (@sunilea)